Wednesday, May 13, 2020

नशा एक अभिशाप

नशा एक ऐसी बुराई है जिससे अनमोल मनुष्य जीवन नाश हो जाता है नशे के लिए आज हमारे समाज में शराब तंबाकू गांजा अफीम चरस आदि वस्तुएं है जिनका सेवर करके युवा समाज पतन के रास्ते पर जा रहा है आज हमारे समाज में नशा करने से प्रतिदिन अनेक मौत हो जाती है नशा इस जीवन के लिए एक अभिशाप है लेकिन इससे बचने की बजाय आज हर एक व्यक्ति नशा करा है नशा करने से हमारे शरीर के मुख्य अंश खराब हो जाते हैं और हमें अनेकों बीमारियों का सामना करना पड़ता है नशे से पैसे की बर्बादी होती है जिससे हमारी घर की अर्थव्यवस्था खराब हो जाती है और हमारा जीवन तहत नाइस हो जाता है आज जो व्यक्ति नशा करते हैं उसकी समाज में बहुत कम इज्जत होती है और घर वाले भी उसकी इज्जत नहीं करते हमें इस नशे से बचना चाहिए क्योंकि नशा है हमारा नाश है

आज सरकार व अन्य समाजसेवी संस्थाओं के द्वारा नशा मुक्त केंद्र चलाए जा रहे हैं जो नशा मुक्त भारत बनाने का प्रयास कर रही है हर व्यक्ति अपनी जिंदगी अच्छे से जि सके क्योंकि नशे के कारण जिनकी बर्बाद हो जाती है लेकिन इतनी संस्था वह नशा मुक्ति केंद्र होने के बावजूद भी यह नहीं दिखाई दे रहा कि किसी ने नशा छोड़ा है क्योंकि नशे की एक ऐसी लत है जो एक बार लग जाती है तो व्यक्ति चाह कर भी उसे छोड़ नहीं पाता इसी कारण इन संस्था के भी कहीं न कहीं यह दिख रहा है कि आप खड़े हो रहे हैं यह भी हमारे समाज को नशा मुक्त कराने में असफल दिख रही हैं इनका प्रयास अच्छा है कि नशा मुक्त भारत बने लेकिन किस हद तक यह सत्र हो पा रही है आप और हम देख रहे हैं तो फिर कैसे होगा ऐसा होता है



ऐसे होगा भारत नशा मुक्त 
नशा मुक्त भारत बनाने के लिए वैसे तो सरकार व अन्य संस्थाएं अपना काम कर रही है लेकिन सफल होती हुई दिखाई दे नहीं रही है लेकिन आज हम आपको एक ऐसे संत के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे नाम दीक्षा लेकर मर्यादा में रहकर भक्ति करने मात्र से आपकी कितनी भी पुरानी नशे की लत क्यों ना हो क्षण भर में छूट जाएगी आपको यह सुनकर आश्चर्य  हो रहा होगा कि भला ऐसे कैसे हो सकता है लेकिन हो रहा है आज अनेक व्यक्तियों ने नशा करना छोड़ दिया है सिर्फ नाम दीक्षा लेकर अपना सुख में जीवन जी रहे हैं आज वह नशा करने की तो दूर की बात है वे नशे को हाथ तक भी नहीं लगाते वह संत कोई और नहीं संत रामपाल जी महाराज ही हैं जी हां वह संत रामपाल जी महाराज जी हैं जिनसे नाम दीक्षा लेकर आप जितनी चाहे भी पुरानी लत हो आप तो छोड़ देंगे क्योंकि संत रामपाल जी महाराज सभी शास्त्रों के अनुसार भक्ति विधि बताते हैं जिससे हमें पूर्ण लाभ मिलते हैं ओर हमारे सभी रोग नशा भराई सब छूट जाते हैं तो बोलो संत रामपाल जी महाराज की जय हो




नशा, नशा कैसे छोड़े , नशे की लत , नशा एक अभिशाप

Friday, May 8, 2020

सत भक्ति क्या है

सत भक्ति क्या है आज इसी विषय में बात करेंगे सत भक्ति का मतलब सीधा सा साफ है कि सच्ची भक्ति सच्ची भक्ति यानी कि हमारी शास्त्रों के अनुसार जो भक्ति हम करते हैं वह सच्ची भक्ति कहलाती है लेकिन हम यह कैसे जाने कि जो हम भक्ति कर रहे हैं वह शास्त्र के अनुसार है या नहीं क्योंकि आज जितने भी धर्मगुरु हैं वह हमारे शास्त्रों का हवाला देकर हमें यही कहते हैं कि यह भक्ति विधि हमारे शास्त्रों के अनुसार हैं लेकिन कोई भी धर्मगुरु हमें शास्त्र को खोलकर यह नहीं दिखाता कि हां यह भक्ति विधि इस शास्त्र में लिखी हुई है और यह परमात्मा है हमारे शास्त्रों के अनुसार और हमें इसकी भक्ति करनी चाहिए लेकिन आज हम आपको एक ऐसे धर्मगरु संत के बारे में बताएंगे जो हमें शास्त्रों के अनुसार भक्ति करवाते हैं वह केवल शास्त्रों का हवाला नहीं देते बल्कि हमें शास्त्र खोलकर भी दिखाते हैं किस शास्त्र में कौन सी भक्ति विधि बताई गई है और किस परमात्मा की भक्ति हमें करनी चाहिए वह संत रामपाल जी महाराज हैं जो हमें शास्त्रों के अनुसार भक्ति करवाते हैं 


अधिक जानकारी के लिए देखिए साधना चैनल रात्रि 7:30 से 

सत भक्ति

Saturday, February 9, 2019




गीता जी के अध्याय नं. 15 का श्लोक नं. 16
द्वौ, इमौ, पुरुषौ, लोके, क्षरः, च, अक्षरः, एव, च, क्षरः, सर्वाणि, भूतानि, कूटस्थः, अक्षरः, उच्यते।।
अनुवाद: इस संसारमें दो प्रकारके भगवान हैं नाशवान और अविनाशी और ये सम्पूर्ण भूतप्राणियोंके शरीर तो नाशवान और जीवात्मा अविनाशी कहा जाता है।
गीता जी के अध्याय नं. 15 का श्लोक नं. 17
 उतमः, पुरुषः, तु, अन्यः, परमात्मा, इति, उदाहृतः, यः, लोकत्रायम् आविश्य, बिभर्ति, अव्ययः, ईश्वरः।।
अनुवाद: उत्तम भगवान तो अन्य ही है जो तीनों लोकोंमें प्रवेश करके सबका धारण-पोषण करता है एवं अविनाशी परमेश्वर परमात्मा इस प्रकार कहा गया है।
कबीर, अक्षर पुरुष एक पेड़ है, निरंजन वाकी डार।
त्रिदेवा (ब्रह्मा, विष्णु, शिव) शाखा भये, पात भया संसार।।
कबीर, तीन देवको सब कोई ध्यावै, चौथा देवका मरम न पावै।
चौथा छांडि पँचम ध्यावै, कहै कबीर सो हमरे आवै।।
कबीर, तीन गुणन की भक्ति में, भूलि पर्यौ संसार।
कहै कबीर निज नाम बिन, कैसे उतरै पार।।
कबीर, ओंकार नाम ब्रह्म (काल) का, यह कर्ता मति जानि।
सांचा शब्द कबीर का, परदा माहिं पहिचानि।।
कबीर, तीन लोक सब राम जपत है, जान मुक्ति को धाम।
रामचन्द्र वसिष्ठ गुरु किया, तिन कहि सुनायो नाम।।
कबीर, राम कृष्ण अवतार हैं, इनका नाहीं संसार।
जिन साहब संसार किया, सो किनहु न जनम्यां नारि।।
कबीर, चार भुजाके भजनमें, भूलि परे सब संत।
कबिरा सुमिरै तासु को, जाके भुजा अनंत।।
कबीर, वाशिष्ट मुनि से तत्वेता ज्ञानी, शोध कर लग्न धरै।
सीता हरण मरण दशरथ को, बन बन राम फिरै।।
कबीर, समुद्र पाटि लंका गये, सीता को भरतार।
ताहि अगस्त मुनि पीय गयो, इनमें को करतार।।
कबीर, गोवर्धन कृष्ण जी उठाया, द्रोणागिरि हनुमंत।
शेष नाग सब सृष्टी उठाई, इनमें को भगवंत।।
गरीब, दुर्वासा कोपे तहां, समझ न आई नीच।
छप्पन कोटि यादव कटे, मची रूधिर की कीच।।
कबीर, काटे बंधन विपति में, कठिन किया संग्राम।
चीन्हों रे नर प्राणियां, गरुड बडो की राम।।
कबीर, कह कबीर चित चेतहू, शब्द करौ निरुवार।
श्री रामचन्द्र को कर्ता कहत हैं, भूलि पर्यो संसार।।
कबीर, जिन राम कृष्ण निरंजन किया, सो तो करता न्यार।
अंधा ज्ञान न बूझई, कहै कबीर बिचार।।
कबीर, तीन गुणन (ब्रह्मा, विष्णु, शिव) की भक्ति में, भूल पड़यो संसार।
कहै कबीर निज नाम बिना, कैसे उतरो पार।।
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नशा एक अभिशाप

नशा एक ऐसी बुराई है जिससे अनमोल मनुष्य जीवन नाश हो जाता है नशे के लिए आज हमारे समाज में शराब तंबाकू गांजा अफीम चरस आदि वस्तुएं है जिनका सेव...